प्राणनाथ जी मंदिर पन्ना — प्रणामी तीर्थ, 1692 की वास्तुकला और शरद पूर्णिमा

प्राणनाथ जी मंदिर पन्ना के प्रमुख धार्मिक-ऐतिहासिक स्थलों में है। जिला पन्ना के अनुसार मंदिर 1692 में बना, इसमें हिंदू और मुस्लिम स्थापत्य का मिश्रण है और शरद पूर्णिमा पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

Prannath Temple, Panna
वास्तविक फोटो: Wikimedia Commons · Wikimedia Commons contributor · See file page

प्रणामी परंपरा का प्रमुख तीर्थ

यह मंदिर प्रणामी संप्रदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। जिला पन्ना के अनुसार महामति प्राणनाथजी 11 वर्ष इस स्थान पर रहे और बाद में मंदिर के एक गुंबद में समाधि लेने की धार्मिक मान्यता जुड़ी है।

वास्तुकला

मंदिर के गुंबद और कमलाकार संरचनाओं में हिंदू और मुस्लिम स्थापत्य का मेल बताया गया है। श्री गुम्मटजी की गोलाकार रचना और नौ संगमरमर गुंबद इसके प्रमुख स्थापत्य तत्व हैं।

मैहर यात्रा में क्यों जोड़ें?

यदि आप मैहर में एक रात रुककर पन्ना की ओर दूसरा दिन देना चाहते हैं, तो जुगल किशोर जी के साथ प्राणनाथ मंदिर धार्मिक यात्रा को अधिक पूर्ण बनाता है। टाइगर रिजर्व जोड़ना हो तो समय और सफारी व्यवस्था अलग से देखें।

शरद पूर्णिमा

यह प्रमुख पर्व-समय है, इसलिए उस अवधि में भीड़, वाहन और ठहरने की व्यवस्था पहले से जाँचना उचित है।

मंदिर के छह भाग

जिला पन्ना मंदिर को श्री गुम्मटजी, श्री बंगलाजी, श्री सदगुरु मंदिर, श्री बैजूराजजी मंदिर, श्री चौपड़ा मंदिर और श्री खिजड़ा मंदिर—इन छह भागों में विभाजित बताता है। इसलिए यह केवल एक गर्भगृह वाला छोटा पड़ाव नहीं, बल्कि देखने योग्य विस्तृत धार्मिक परिसर है।

पन्ना में कितना समय रखें?

जुगल किशोर और प्राणनाथ दोनों देखने हों तो शहर-दर्शन के लिए पर्याप्त समय रखें। सफारी उसी दिन जोड़ने से पहले बुकिंग और प्रवेश समय सुनिश्चित करना जरूरी है।

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